गाय के बारे में कुछ रोचक तथ्‍य – देसी गाय के गौ मूत्र के लाभ

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आयुर्वेद में गौ मूत्र के अनेको फायदे बताए गए है. वैज्ञानिकों ने भी पाया है के गौ मूत्र में कुछ ऐसे तत्व होते है जो शरीर  से कई तरह की बीमारियों को दूर रखते है. आइये जानते है गौ मूत्र से होने  वाले स्वास्थ्य लाभ। शास्‍त्रों में ऋषियों-महर्षियों ने गौ की अनंत महिमा लिखी है। उनके दूध, दही़, मक्खन, घी, छाछ, मूत्र आदि से अनेक रोग दूर होते हैं। गोमूत्र एक महौषधि है इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम क्लोराइड, फॉस्‍फेट, अमोनिया, कैरोटिन, स्वर्ण क्षार आदि पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं इसलिए इसे औषधीय गुणों की दृष्टि से महौषधि माना गया है। गोमूत्र मनुष्य जाति तथा चिकित्सा जगत् को प्राप्त होने वाला अनुदान है। यह धर्मानुमोदित, प्राकृतिक, सहज, प्राप्य, हानिरहित, कल्याणकारी एवं आरोग्यवर्ध्दक रसायन है। गोमूत्र योगियों का दिव्य पान रहा है, वे इससे दिव्य शक्ति पाते थे।

अमेरिका में अनुसंधान से सिध्द हुआ है कि विटामिन बी गाय के पेट में सदा ही रहता है। यह सतोगुणी रस है, विचारों में सात्विकता लाता है। छह मास लगातार पीने से आदमी की प्रकृति सतोगुणी हो जाती है। आयुर्वेद की बहुत सी विषैली जड़ी-बूटियां व विष के पदार्थ गोमूत्र से ही शुध्द किये जाते हैं। गौ में सब देवताओं का वास है। यह कामधेनु का स्वरूप है।

गोमूत्र हमारे लिए निम्न प्रकार उपयोगी है
  1. कीटाणुओं से होने वाली सभी प्रकार की बीमारियां नष्ट होती हैं।
  2. शरीर में यकृत को सही कर स्वच्छ खून बनाकर किसी भी रोग का विरोध करने की शक्ति प्रदान करता है।
  3. गोमूत्र में ऐसे तत्व हैं, जो हमारे शरीर के आरोग्यदायक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।
  4. मस्तिष्क एवं हृदय को शक्ति प्रदान करता है। मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा होती है।
  5. शरीर में किसी भी औषधि का अति प्रयोग हो जाने से जो तत्व शरीर में रहकर किसी प्रकार से उपद्रव करते हैं, उनको गोमूत्र अपनी विषनाशक शख्ति से नष्ट कर रोगी को निरोग करता है।
  6. रसायन है, यह बुढ़ापा रोकता है।
  7. शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर उसकी पूर्ति करता है।
  8.  मानव शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति को बढ़ा कर रोगों को नाश करने की शक्ति प्रदान करता है।

गौमाता एक चलती फिरती चिकित्सालय है। गाय के रीढ़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है जो सूर्य के गुणों को धारण करती है। सभी नक्षत्रों की यह रिसीवर है। यही कारण है कि गौमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी में औषधीय गुण होते हैं।

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गोमूत्र में रसायन विज्ञान के मतानुसार निम्न रासायनिक तत्व पाये जाते हैं
नाइट्रोजन, सल्फर, गंधक, अमोनिया, कॉपर, यूरिया, यूरिक एसिड, फॉस्फेट, सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीज, कार्बोलिक एसिड, कैल्शियम, साल्ट, विटामिन ए, बी, डी, ई, स्वर्णाक्षर।
क्या है गौ माता का वैज्ञानिक महत्व ?
  1. गाय धरती पर एकमात्र ऐसा प्राणी है जो आक्सीजन ग्रहण करके आक्सीजन ही छोड़ता है |
  2. गाय का दूध फेट्स रहित होता है परन्तु यह बहुत शक्तिशाली माना जाता है जिसे कितना भी पीने से मोटापा नहीं होता और स्त्रियों के प्रदर रोग में भी यह बहुत लाभदायक होता है |
  3. दूध देते समय गाय के मूत्र में लाक्टोसे की वृद्धि होती है जो हृदय रोगों के लिए बेहद लाभकारी होता है |
  4. गाय के गोबर में विटामिन बी-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो रेडियोधर्मिता को सोख लेता है |
  5. थोडा सा गौ मूत्र सुबह खाली पेट पीने से कैंसर जल्द ठीक हो जाता है और गौ माता के सींग को सहराने से उन्हें प्राकर्तिक उर्जा मिलती है |
  6. गौ या फिर उसके बछड़े के रंभाने पर निकलने वाली आवाज़ मंदिक विकृतियों तथा मानसिक रोगों को नष्ट कर देती है |
  7. गाय के शरीर से निकलने वाली सात्विक तरंगे आस-पास के वायुमंडल को प्रदूषण रहित रखने में सहायक होती हैं |
  8. गाय के गोबर से बने उपलों को जलाने से मक्खी, मच्छर आदि कीटाणु पैदा नहीं होते तथा दुर्गन्ध का भी नाश हो जाता है |
  9. गाय के शरीर पर प्रतिदिन 15 से 20 मिनट हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियाँ एकदम ठीक हो जाती है |
  10. गाय के शरीर में से प्राकर्तिक रूप से गूगल की गंध निकलती है |

देसी गाय के गौ मूत्र के लाभ

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देसी गाय के गौ मूत्र में कई उपयोगी तत्व पाए गए हैं, इसीलिए गौमूत्र के कई सारे फायदे है|गौमूत्र अर्क (गौमूत्र चिकित्सा) इन उपयोगी तत्वों के कारण इतनी प्रसिद्ध है|देसी गाय गौ मूत्र में जो मुख्य तत्व हैउनमें से कुछ का विवरण जानिए।

  1. यूरिया (Urea) : यूरिया मूत्र में पाया जाने वाला प्रधान तत्व है और प्रोटीन रस-प्रक्रिया का अंतिम उत्पाद है| ये शक्तिशाली प्रति जीवाणु कर्मक है|
  2. यूरिकएसिड (Uric acid): ये यूरिया जैसा ही है और इस में शक्तिशाली प्रति जीवाणु गुण हैं| इस के अतिरिक्त ये केंसर कर्ता तत्वों का नियंत्रण करने में मदद करते हैं|
  3. खनिज (Minerals): खाद्य पदार्थों से व्युत्पद धातु की तुलना मूत्र से धातु बड़ी सरलता से पुनः अवशोषित किये जा सकते हैं| संभवतः मूत्र में खाद्य पदार्थों से व्युत्पद अधिक विभिन्न प्रकार की धातुएं उपस्थित हैं| यदि उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो मूत्र पंकिल हो जाता है| यह इसलिये है क्योंकि जो एंजाइम मूत्र में होता है वह घुल कर अमोनिया में परिवर्तित हो जाता है, फिर मूत्र का स्वरुप काफी क्षार में होने के कारण उसमे बड़े खनिज घुलते नहीं है | इसलिये बासा मूत्र पंकिल जैसा दिखाई देता है | इसका यह अर्थ नहीं है कि मूत्र नष्ट हो गया | मूत्र जिसमे अमोनिकल विकार अधिक हो जब त्वचा पर लगाया जाये तो उसे सुन्दर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |
  4. उरोकिनेज (Urokinase):यह जमे हुये रक्त को घोल देता है,ह्रदय विकार में सहायक है और रक्त संचालन में सुधार करता है |
  5. एपिथिल्यमविकास तत्व (Epithelium growth factor)क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतक में यह सुधर लाता है और उन्हें पुनर्जीवित करता है|
  6. समूहप्रेरित तत्व(Colony stimulating factor): यह कोशिकाओं के विभाजन और उनके गुणन में प्रभावकारी होता है |
  7. हार्मोनविकास (Growth Hormone): यह विप्रभाव भिन्न जैवकृत्य जैसे प्रोटीन उत्पादन में बढ़ावा, उपास्थि विकास,वसा का घटक होना|
  8. एरीथ्रोपोटिन (Erythropotein): रक्ताणु कोशिकाओं के उत्पादन में बढ़ावा |
  9. गोनाडोट्रोपिन (Gonadotropins): मासिक धर्म के चक्र को सामान्य करने में बढ़ावा और शुक्राणु उत्पादन |
  10. काल्लीकरीन (Kallikrin): काल्लीडीन को निकलना, बाह्य नसों में फैलाव रक्तचाप में कमी |
  11. ट्रिप्सिननिरोधक (Tripsin inhibitor):मांसपेशियों के अर्बुद की रोकथाम और उसे स्वस्थ करना |
  12. अलानटोइन (Allantoin): घाव और अर्बुद को स्वस्थ करना |
  13. कर्करोगविरोधी तत्व (Anti cancer substance): निओप्लासटन विरोधी, एच -११ आयोडोल – एसेटिक अम्ल, डीरेकटिन, ३ मेथोक्सी इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं जो सभी प्रकार के कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं | यह कर्क रोग के कोशिकाओं के गुणन को प्रभावकारी रूप से रोकता है और उन्हें सामान्य बना देता है |
  14. नाइट्रोजन (Nitrogen) : यह मूत्रवर्धक होता है और गुर्दे को स्वाभाविक रूप से उत्तेजित करता है |
  15. सल्फर (Sulphur) : यह आंत कि गति को बढाता है और रक्त को शुद्ध करता है |
  16. अमोनिया (Ammonia) : यह शरीर की कोशिकाओं और रक्त को सुस्वस्थ रखता है |
  17. तांबा (Copper) : यह अत्यधिक वसा को जमने में रोकधाम करता है |
  18. लोहा (Iron) : यह आरबीसी संख्या को बरकरार रखता है और ताकत को स्थिर करता है |
  19. फोस्फेट (Phosphate) : इसका लिथोट्रिपटिक कृत्य होता है |
  20. सोडियम (Sodium) : यह रक्त को शुद्ध करता है और अत्यधिक अम्ल के बनने में रोकथाम करता है |
  21. पोटाशियम (Potassium) : यह भूख बढाता है और मांसपेशियों में खिझाव को दूर करता है |
  22. मैंगनीज (Manganese) : यह जीवाणु विरोधी होता है और गैस और गैंगरीन में रहत देता है |
  23. कार्बोलिकअम्ल (Carbolic acid) : यह जीवाणु विरोधी होता है |
  24. कैल्सियम (Calcium) : यह रक्त को शुद्ध करता है और हड्डियों को पोषण देता है , रक्त के जमाव में सहायक|
  25. नमक (Salts) : यह जीवाणु विरोधी है और कोमा केटोएसीडोसिस की रोकथाम |
  26. विटामिनबी सी डी और ई (Vitamin A, B, C, D & E): अत्यधिक प्यास की रोकथाम और शक्ति और ताकत प्रदान करता है |
  27. लेक्टोसशुगर (Lactose Sugar): ह्रदय को मजबूत करना, अत्यधिक प्यास और चक्कर की रोकथाम |
  28. एंजाइम्स (Enzymes): प्रतिरक्षा में सुधार, पाचक रसों के स्रावन में बढ़ावा |
  29. पानी (Water) : शरीर के तापमान को नियंत्रित करना| और रक्त के द्रव को बरक़रार रखना |
  30. हिप्पुरिकअम्ल (Hippuric acid) : यह मूत्र के द्वारा दूषित पदार्थो का निष्कासन करता है |
  31. क्रीयटीनीन (Creatinine) : जीवाणु विरोधी|
  32. स्वमाक्षर (Swama Kshar): जीवाणु विरोधी, प्रतिरक्षा में सुधार, विषहर के जैसा कृत्य | एक ८ माह गर्भवती गाय में कुछ हार्मोन|

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आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र को विषनाशक, रसायन, त्रिदोषनाशक माना गया है, गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। गौमूत्र से लगभग 108 रोग ठीक होते हैं। गौमूत्र स्वस्थ देशी गाय का ही लेना चाहिए। काली बछिया का हो तो सर्वोत्तम। बूढ़ी, अस्वस्थ व गाभिन गाय का मूत्र नहीं लेना चाहिए। गौमूत्र को कांच या मिट्टी के बर्तन में लेकर साफ सूती कपड़े के आठ तहों से छानकर चौथाई कप खाली पेट पीना चाहिए।गौमूत्र से ठीक होने वाले कुछ रोगों के नाम – मोटापा, कैंसर, डायबिटीज, कब्ज, गैस, भूख की कमी, वातरोग, कफ, दमा, नेत्ररोग, धातुक्षीणता, स्त्रीरोग, बालरोग आदि।

गौमूत्र से विभिन्न प्रकार की औषधियाँ भी बनाई जाती है:
  1. गौमूत्र अर्क(सादा)
  2. औषधियुक्त गौमूत्र अर्क(विभिन्न रोगों के हिसाब से)
  3. गौमूत्र घनबटी
  4. गौमूत्रासव
  5. नारी संजीवनी
  6. बालपाल रस
  7. पमेहारी आदि।
गोमूत्र प्रातः-सायं पीने से निम्न रोगों में लाभ होता है:

कैंसर, भूख की कमी, अजीर्ण, हार्निया, मिर्घी, चक्कर आना, बवासीर, प्रमेह, मधुमेह, कब्ज, उदररोग, गैस, लू लगना, पीलिया, खुजली, मुखरोग, ब्लड प्रेशर, कुष्ठ रोग, पीलिया, भगंदर, दंत रोग, धातु क्षीणता, नेत्र रोग, जुकाम, बुखार, त्वचा रोग, घाव, सिरदर्द, दमा, स्त्री रोग, स्तन रोग, हिस्टीरिया, अनिद्रा।

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